World's Largest Youth Network

सूचना अधिकार अधिनियम

 

नेहरू युवा केन्द्र संगठन

युवा मामले और खेल मंत्रालय

भारत सरकार

 

सूचना का अधिकार

 

नेहरू युवा केन्द्र संगठन

2 मंजिल, कोर-चतुर्थ, स्कोप मीनार, लक्ष्मी नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर

विकास मार्ग, दिल्ली - 110 092

 

अपीलीय प्राधिकारी का नाम (केवल मुख्यालय के लिए): मेजर जनरल दिलावर सिंह, महानिदेशक मुख्यालय

सीपीआईओ का नाम (केवल मुख्यालय मामले के लिए): श्री नंद कुमार सिंह, उप निदेशक, नई दिल्ली मुख्यालय

सीपीआईओ के पते के लिए राज्य कार्यालयों

आर टी आइ शुल्क = 10 / -

फोन: 011-22402800,22446070, फैक्स: 22446069

 

सूचना का अधिकार

 

नेहरू युवा केन्द्र संगठन

 

 

क्र्म संख्या सामग्री
1. परिचय
2. आरटीआई अधिनियम के तहत आवेदन कैसे करें
3 संगठनात्मक संरचना
4 संस्था की नियमावली
5 नेहरू युवा केंद्र संगठन के नियम
6 विभिन्न पदों की नौकरी की ज़िम्मेदारी
7 विभिन्न समितिया       
  • शासक मंडल
  • युवा कार्यक्रमों पर जिला सलाहकार समिति
8 प्रत्येक अधिकारी द्वारा प्राप्त अधिकारियों और मासिक यादों का विवरण
9मुख्यालय में विभिन्न अनुभागों की भूमिका
  • कार्मिक अनुभाग
  • कार्यक्रम अनुभाग
  • लेखा अनुभाग
  • सामान्य प्रशासन अनुभाग
  • सतर्कता अनुभाग
  • आरईटी अनुभाग
  • मीडिया अनुभाग

 

 

 

 

 

 

परिचय

 

नेहरू युवा केंद्र संगठन ;नेयुकेसद्ध भारत के 623 जिलों में अपने कार्यालयों के साथ युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त शासी निकाय है। नेयुकेस विश्व का सबसे बड़ा जमीनी स्तर का गैर.राजनीतिक संगठन हैए जो की 1.24 ग्राम आधारित संस्थाओंए जिन्हें युवा मण्डल कहते हैंए के माध्यम से 8 लाख से अधिक गैर.छात्र ग्रामीण युवाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए पंजीकृत हैं। यह शिक्षा और प्रशिक्षणए जागरूकता उत्पन्न करनेए कौशल विकास और स्वयंरोजगारए उद्यम निर्माणए बचत और सहयोगए खेल और साहस और मस्तिष्क के माध्यम से नए विचारों और विकास रणनीतियों के निरंतर संपर्क के माध्यम से शारीरिक विकास के क्षेत्रों को कवर करता है । इन गतिविधियोंए पर्यवेक्षणए निगरानी और मूल्यांकन के लिए संगठन के पूरे देश में 29 राज्य कार्यालय हैं। इसके अलावाए स्वास्थ्यए परिवार कल्याणए एचआईवी.एड्सए नशीली दवाओं के दुरुपयोगए गरीबी उन्मूलनए बाल श्रमए पर्यावरणए संवर्धनए साक्षरताए महिला सशक्तिकरणए सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन और अन्य विषयों पर ग्रामीण युवाओं की सक्रिय भागीदारी होती है और गांवों में स्थानीय राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर मूल्यए दृष्टि और स्वैच्छिक कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।

 

उपरोक्त रणनीति के पीछे मूल विचारए ग्रामीण युवाओं को राष्ट्रीय विकास की मुख्य धारा में लाना है क्योंकि सक्रिय प्रतिभागी ए आधुनिक और तकनीकी भारत के जिम्मेदार और उत्पादक नागरिक हैंए क्योंकि युवा न केवल विकास के लिए एक प्रमुख मानव संसाधन हैं बल्कि वे सामाजिक परिवर्तनए आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार के लिए मुख्य उत्प्रेरक भी हैं। उनकी कल्पनाए आदर्शए ऊर्जा और दृष्टि समाज के निरंतर विकास में आवश्यक हैं जिसमें वे रहते हैं। युवा लोगों के साथ.साथ उनकी दृष्टि और आकांक्षाओं की समस्याएं आज के समाज और भावी पीढ़ी की चुनौती और संभावनाओं के लिए आवश्यक घटक हैं। इसके परिणाम स्वरूप एनेयुकेस एक संगठन के रूप में नहीं ए बल्कि देश के ग्रामीण युवा आंदोलन के रूप में उभरा हैं।

 

 

 


आरटीआई अधिनियम के तहत आवेदन कैसे करें

 

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

नेहरू युवा केन्द्र संगठन/

सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन कैसे करें

सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन करते समय कृपया निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें

1. सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना के लिए आवेदन प्राप्त करने के लिए नेहरू युवा केन्द्र संगठन मुख्यालय पर सुविधा काउंटर बनाने की व्यवस्था की गई है।

2. आवेदन/निवेदन आपेक्षित शुल्क के साथ सीधे नेहरू युवा केन्द्र संगठन मुख्यालय, मंडल कार्यालयों एवं केन्द्रों में डाक द्वारा सी पी आई ओ के पास भेजे जा सकते हैं।

3. आवेदन/अनुरोध के साथ आपेक्षित शुल्क का भुगतान सम्यक प्राप्ति रसीद के साथ नकद अथवा डिमांड ड्राफ्ट अथवा बैंकर चेक अथवा मुख्यालयों एवं मंडल कार्यालयों में जन सूचना अधिकारियों से सूचना की चाहने वाले व्यक्ति को ‘‘नेहरू युवा केन्द्र संगठन’’ के पक्ष में एवं केन्द्रों से सूचना चाहने वाले व्यक्ति को ”जिला युवा समन्वयक, नेहरू युवा केन्द्र सगठन, -------- (जिले का नाम)” के पक्ष में देय इंडियन पोस्टल आर्डर के रूप में करना होगा।

4. सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत शुल्क इत्यादि के बारे में नियमों का विवरण कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की वेबसाइट http://www.persmin.nic.in/ से प्राप्त किया जा सकता है।



संस्था की नियमावली

 

1.     संस्था का नाम नेहरू युवा केन्द्र संगठन होगा। (जिसे इसके बाद ”संगठन” कहा जाएगा).

 

2.    संगठन का पंजीकृत कार्यालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली/नई दिल्ली में होगा जोकि वर्तमान में शास्त्री भवन, नई दिल्ली में है।

3.    संगठन की स्थापना के उद्देश्य निम्नलिखित होंगेः-

 

i)            वर्तमान नेहरू युवा केन्द्रों को अपने अधिकार में लेना, उनका प्रबंधन, प्रशासन एवं संचालन करना।

ii)           भारत के किसी भी स्थान में नए नेहरू युवा केन्द्रां की स्थापना, संचालन, प्रबंधन एवं प्रशासन करना।

iii)         युवाओं मे राष्ट्रीय एकीकरण, एकता एवं धर्मनिरपेक्षता की भावना को प्रोत्साहन देना और उनका विकास करना।

iv)        युवाओं को युवा नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम, सामुदायिक गायन, सांस्कृतिक गतिविधियां, कार्य शिविर, खेल की गतिविधियां, स्वयं सहायता कार्यक्रम, शारीरिक शिक्षा एवं प्रौढ़ शिक्षा, चरित्र निर्माण एवं सहकारिता आंदोलन इत्यादि के कार्यक्रमों से जोड़ना।

v)          युवाओं को समग्र ग्रामीण विकास कार्यक्रम (आईआरडीपी), स्वरोजगार के लिए युवाओं का प्रशिक्षण (ट्राइसेम), स्वरोजगार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, प्रौढ़ शिक्षा इत्यादि सरकारी प्रशासन के कार्यक्रमों के विविध विभागों/एजेंसियों से युवाओं को जोड़ने के लिए एक समन्वय एजेंसी की भूमिका अदा करना।

vi)        ग्रामीण युवाओं के बीच जागरूकता उत्पन्न करना तथा उन्हें विविध ग्रामीण एवं विकास कार्यक्रमो ंका लाभ लेने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना।

vii)          ग्रामीण क्षेत्र में चलाए जा रहे विभिन्न विभागों/एजेंसियों के कार्यक्रमों/योजनाओं के बारे में सम्यक् जानकारी प्रदान करने के लिए पदाधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमो ंका आयोजन करना।

viii)        भारत में संगठन के क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना, संचालन, प्रबंधन एवं प्रशासन करना। पगद्ध प्रशासनिक, तकनीकी एवं गैर तकनीकी एवं अन्य पदों को उत्पन्न करना, उन पर नियुक्ति करना, पदोन्नति करना एवं उनका स्थानांतरण करना।;

ix)        To create administrative, technical and non-technical and other posts and to make appointments, promotions and transfer thereto;

x)         अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भारत के बाहर एवं भीतर राज्य सरकार, संघ क्षेत्र प्रशासन एवं अन्य संगठनों के साथ गठजोड़ करना।

xi)        स्वतः संज्ञान पर अथवा सरकार द्वारा मांगे जाने पर भारत सरकार को अपनी सीमा के भीतर सभी मामलों पर परामर्श प्रदान करना।

xii)          युवा अथवा उससे जुड़े हुए मामलों पर सेमिनारों, सम्मेलनों का आयोजन, प्रायोजित करना एवं उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करना।

xiii)        युवाओं से जुड़े हुए समाचार पत्रों/पत्रिकाओं को प्रकाशित करना, प्रायोजित करना तथा उसे प्रोत्साहित करना; इन उद्देश्यों के कार्यान्वयन के लिए मानदेय प्रदान करना।

xiv)       इन उद्देश्यों के कार्यान्वयन हेतु पुरस्कार, सम्मान एवं मानदेय की स्थापना, प्रस्ताव एवं सहयोग करना।

xv)       आवश्यकता अनुसार बोर्ड, समितियां एवं अन्य निकायों का गठन एवं उनके लिए शक्तियों, कार्यों एवं कार्यकाल इत्यादि की व्यवस्था करना।

xvi)       इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किसी भी प्रकार के दान, अनुदान एवं उपहार को स्वीकार करना अथवा जुटाना एवं किसी भी संस्थान अथवा ट्रस्ट का प्रबंधन अपने हाथ में लेना एवं उसे दान, अनुदान एवं उपहार प्रदान करना।

xvii)     संगठन से सम्बद्ध चल अथवा अचल सम्पत्ति की प्रतिभूति अथवा बिना प्रतिभूति उधार लेना एवं उधार लेना बशर्तें कि इस संबंध में भारत सरकार की पूर्व अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होगा।

xviii)    चल अथवा अचल सम्पत्ति का अधिग्रहण करना, क्रय करना अथवा किसी अन्य प्रकार से उसका कब्जा प्राप्त करना, लीज पर लेना, किराये पर लेना तथा ऐसी चल अथवा अचल सम्पत्ति की बिक्री, गिरवी, स्थानांतरण या किसी अन्य प्रकार से निस्तारण करना बशर्ते इस प्रकार की चल अथवा अचल सम्पत्ति के इस प्रकार निस्तारण के बारे में भारत सरकार से पूर्वानुमति आवश्यक होगी।

xix)       संगठन के कार्यां को निष्पादित करने के लिए नियम बनाना तथा उनमें समय समय पर नया जोड़ना, बदलाव करना, सुधार करना अथवा निरस्त करना।

xx)       एक ‘फंड’ रखना जोकि संगठन में निहित होगा।

xxi)        सामान्यतया उन सभी मापदण्डां को अपनाना जोकि समय समय पर उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक होंगे।

xxii)      उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति अथवा उनमें से किसी एक की प्राप्ति के पश्चात उन सभी कार्यों को करना जिसे संगठन के लिए आवश्यक, हितकर अथवा प्रासंगिक समझता है।

 

4.   संगठन सोसायटी की समस्त चल अथवा अचल सम्पत्तियां, आय अथवा प्राप्तियों का उपयोग पूरी तरह से इस संस्था के नियमों में दिए गए उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किया जाएगा और उसका कोई भी भाग प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से संगठन के वर्तमान अथवा पूर्व सदस्यों को लाभांश, बोनस लाभ अथवा किसी अन्य तरीके से हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। संगठन सोसायटी का कोई भी सदस्य सदस्यता के आधार पर संगठन के किसी भी चल अथवा अचल सम्पत्ति पर कोई निजी दावा नहीं करेगा।

 

5.   संघ क्षेत्र दिल्ली में लागू सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1860 के अनुच्छेद 2 के तहत अपेक्षित शासी निकाय के वर्तमान सदस्यों, जिनके हाथों में संगठन का प्रबंधन सौंपा गया है, का नाम, पता एवं व्यवसाय एवं पद निम्नवत हैंः- -

 

 

क्र.सं.

पूरा नाम

पता 

व्यवसाय

संगठन में पद

1.                 

श्रीमती मार्गेट अल्वा

23, सफदरजंग रोड, नई दिल्ली

युवा कल्याण, खेल, महिला एवं बाल विकास विभाग राज्य मंत्री

अध्यक्ष

2.                 

श्री असलम शेर खान

19, डॉ बिशम्भर दास मार्ग, नई दिल्ल्ी

संसद सदस्य

उपाध्यक्ष

3.                 

श्रीमती वैजयन्ती माला बाली

76, लोदी एस्टेट, नई दिल्ली

संसद सदस्य

सदस्य

4.                 

श्री डी. पी. रॉय

79-80, नार्थ एवेन्यू, नई दिल्ली

संसद सदस्य

सदस्य

5.                 

श्री अदिति मंगल दास

11, सफदरजंग रोड,

सांस्कृतिक कलाकार

सदस्य

6.                 

श्री अखिल बक्शी

डी 229, डिफेंस कॉलोनी, नई दिल्ली

महानिदेशक, नेहरू युवा केन्द्र संगठन

सदस्य सचिव

 

6.   हम, अधोस्ताक्षरी, सोसायटी के नियमों के अनुसरण में दिल्ली के संघ क्षेत्र में लागू सोसायटी पंजीयन अधिनियम 1860 के तहत “नेहरू युवा केन्द्र संगठन” नाम से एक सोसायटी बनाने की इच्छा करते हैं।

क्र.सं.

पूरा नाम

पता 

व्यवसाय

संगठन में पद

1.                 

श्रीमती मार्गेट अल्वा

23, सफदरजंग रोड, नई दिल्ली

युवा कल्याण, खेल, महिला एवं बाल विकास विभाग राज्य मंत्री

अध्यक्ष

2.                 

श्री असलम शेर खान

19, डॉ बिशम्भर दास मार्ग, नई दिल्ल्ी

संसद सदस्य

उपाध्यक्ष

3.                 

श्रीमती वैजयन्ती माला बाली

76, लोदी एस्टेट, नई दिल्ली

संसद सदस्य

सदस्य

4.                 

श्री डी. पी. रॉय

79-80, नार्थ एवेन्यू, नई दिल्ली

संसद सदस्य

सदस्य

5.                 

श्री अदिति मंगल दास

11, सफदरजंग रोड,

सांस्कृतिक कलाकार

सदस्य

6.                 

श्री अखिल बक्शी

डी 229, डिफेंस कॉलोनी, नई दिल्ली

महानिदेशक, नेहरू युवा केन्द्र संगठन

सदस्य सचिव

 

 

7. इच्छुक व्यक्तियों के सभी हस्ताक्षर सत्यापित हैं।

 

 

(जे.एल. सुंबाली)

विशेष कार्याधिकारी

भारत सरकार,

मानव संसाधन विकास मंत्रालय,

युवा कार्यक्रम एवं खेल विभाग,

 

 

टिप्पणी : उपरोक्त दर्शाए गए सदस्य 1986-87 में संगठन के गठन के समय में थे।


नेहरू युवा केन्द्र संगठन के नियम

 

(ज) महानिदेशक संगठन से संबंधित सारा रिकार्ड अपने कार्यालय में अथवा शासी बोर्ड द्वारा यदि कोई अन्य स्थान निश्चित किया गया हो तो उस स्थान पर रखेगा अथवा रखने के निमित्त होगा.

 

नियम सं.

विवरण

संक्षिप्त शीर्षक

1

(क)       इन नियमों को नेहरू युवा केन्द्र संगठन नियमावली, 1986 के नाम से जाना जायेगा।

(ख)       ये नियम उस तारीख से प्रभावी होगें जिस दिन सोसायटी, अर्थात नेहरू युवा केन्द्र संगठन, सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत की गई है।

परिभाषाए

2

इन नियमों में जब तक कि इस संदर्भ में कोई अन्य अपेक्षा न होः:-

 

(क)      सोसायटी अथवा संगठन का तात्पर्य नेहरू युवा केन्द्र संगठन है

(ख)       संगठन सोसायटी का अर्थ है इस नियमावली के नियम 4 के अंतर्गत गठित निकाय

(ग)       शासी बोर्ड का अर्थ है इस नियमावली के नियम 30 के अंतर्गत गठित निकाय

(घ)      सरकार का अर्थ है भारत सरकार

(ड़)      अध्यक्ष का अर्थ है संगठन का अध्यक्ष

(च)       उपाध्यक्ष का अर्थ है संगठन का उपाध्यक्ष

f)        महानिदेशक का अर्थ है सरकार द्वारा नियुक्त वह व्यक्ति जो संगठन का महानिदेशक होगा

(ज)       सदस्य सचिव का अर्थ है भारत सरकार द्वारा नियुक्त वह व्यक्ति जो संगठन का महानिदेशक होगा

(झ)      वर्ष का अर्थ है, सरकार का वित्तीय वर्ष, जब तक संगठन द्वारा अन्यथा निर्दिष्ट न किया जाए

i)        ‘Year’ means, unless otherwise specified by the Sangathan, the financial year of the government.

 

 

1.    संगठन सोसायटी

संगठन मुख्यालय  

3

संगठन का कार्यालय दिल्ली/नई दिल्ली में, ऐसे स्थान पर स्थित होगा जो समय-समय पर शासी बोर्ड द्वारा निश्चित किया जायेगा

सोसायटी के सदस्य

4

नेहरू युवा केन्द्र संगठन के नाम से पंजीकृत सोसायटी के निम्नलिखित सदस्य होगेंः- :-

 

1.            युवा कार्यक्रम एवं खेल के प्रभारी मंत्री - अध्यक्ष (पदेन)

2.            युवा कार्यक्रम एवं खेल के प्रभारी राज्य मंत्री - वरिष्ठ उपाध्यक्ष (पदेन)

3.            सचिव, युवा मामले - वरिष्ठ उपाध्यक्ष (पदेन) (उस स्थिति में जब दोनों माननीय मंत्रियों के पद रिक्त हों जैसे युवा कार्यक्रम एवं खेल या राज्य मंत्री)

4 एवं 5 सरकार द्वारा नामित दो सांसद (लोक सभा) -सदस्य

            

6.            सरकार द्वारा नामित एक सांसद (राज्य सभा) - सदस्य

 

7.      सचिव, खेल सदस्य (पदेन)

8.    निदेशक, एनसीसी सदस्य (पदेन)

9.    निदेशक, एलबीएस एनएनए सदस्य (पदेन)

10.    संयुक्त सचिव युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय - सदस्य (पदेन)

11. अतिरिक्त सचिव/संयुक्त सचिव एवं वित्त सलाहकार युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय - सदस्य (पदेन)

12. कार्यक्रम सलाहकार, एनएसएस - सदस्य (पदेन)

13 निदेशक, आरजीएनवाईडी - सदस्य (पदेन)

14 से 18. संस्कृति, समाज कार्य, स्वैच्छिक संस्थाओं, अकादमियों, प्रशिक्षण संस्थानों, सूचना, साहसिक खेलों, कला तथा अन्य संबद्ध क्षत्रों से प्रतिष्ठित व्यक्ति - सदस्य

19. एक अन्य व्यक्ति जिसे अध्यक्ष द्वारा नामित किया जायेगा-सदस्य

20. संगठन का महानिदेशक - सदस्य सचिव (पदेन)

       

 

सोसायटी के तीन सदस्य सरकार द्वारा नामित किये जायेंगे जो उसके उपाध्यक्ष होगें, दोनों उपाध्यक्ष समान लाभ, भत्तों तथा विशेषाधिकारों के अधिकारी होंगे..

विेषेष आमंत्रित 

5

संगठन सोसायटी के अध्यक्ष संगठन की बैठकों में भाग लेने हेतु तीन व्यक्तियों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित कर सकते हैं. ऐसे अतिथियों को बैठकों में वोट देने का अधिकार नहीं होगा।

सदस्यों का रजिस्टर 

6

संगठन सदस्यों का एक रजिस्टर रखेगा जिसमें उनका पूरा नाम, पता तथा व्यवसाय दर्शाया गया होगा और प्रत्येक सदस्य उसमें हस्ताक्षर करेगा. यदि संगठन का सदस्य अपना पता बदलता है तो वह संगठन के सदस्य सचिव को अपना नया पता अधिसूचित करेगा जिसकी प्रविष्टि रजिस्टर में बदले हुए सदस्यों के अनुसार होगी, तथापि जहॉं कोई सदस्य संगठन के सदस्य सचिव को अपना बदला हुआ पता अधिसूचित नहीं करता है. तो सदस्यों के रजिस्टर में दिया गया उसका पता सही समझा जायेगा.

पदेन सदस्यता का निर्धारण

7

   (क) जब एक व्यक्ति अपने कार्यालय अथवा अपने पद पर नियुक्ति के कारण संगठन का सदस्य बन जाता है, तो उस कार्यालय में उसके कार्यकाल की समाप्ति अथवा नियुक्ति से हटने पर संगठन में उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी..

   (ख) संसद के दोनों सदनों के सदस्यों में से नामित संगठन के सदस्य तब तक संगठन के सदस्य रहेंगे जब तक सदन विसर्जित नहीं हो जाता अथवा उसकी अवधि समाप्त नहीं हो जाती अथवा उनकी सदन की सदस्यता समाप्त नहीं हो जाती, अथवा इसमें से जो भी पहले हो. अन्यों की सदस्यता की निर्धारण

अन्यों की सदस्यता की निर्धारण

8

(क) पदेन सदस्यों के अलावा, सदस्यों की सदस्यता निम्नलिखित परिस्थितियों में से किसी एक के भी होने पर निर्धारित की जायेगी :-

  1. सदस्यता की अवधि समाप्त होने पर
  2. मृत्यु, त्यागपत्र, दिवालियापन, पागलपन अथवा नैतिक चरित्रहीनता के कारण हुई अपराध वृत्ति की वजह से दण्डित होने पर

(ख) तीन वर्षों की अवधि के दौरान यदि कोई नैमित्तिक रिक्त स्थान होता है, तो ऐसा रिक्त स्थान उसी प्रकार भरा जायेगा जैसे मूल रिक्त स्थान भरा गया था और इस प्रकार नामित किया गया सदस्य तीन वर्ष की अवधि के शेष अंश के लिए पद पर बना रहेगा. सदस्यता से त्याग पत्र तथा इसके प्रभावी होने की तारीख 10 जब कोई सदस्य संगठन की सदस्यता से त्याग पत्र देने की इच्छा रखता है, तो वह अपना त्याग पत्र महानिदेशक को भेजेगा. त्याग पत्र केवल अध्यक्ष द्वारा उसको स्वीकार किये जाने की तारीख से प्रभावी होगा.

सदस्यता की अवधि

9

(क) अन्य प्रावधानों के अधीन, संगठन का नामित सदस्य अपने नामांकन की तारीख से तीन वर्षों की अवधि के लिए पद पर बना रहेगा. एक सदस्य को अधिकतम दो बार नामित किया जा सकता है.

(ख) तीन वर्षों की अवधि के दौरान यदि कोई नैमित्तिक रिक्त स्थान होता है, तो ऐसा रिक्त स्थान उसी प्रकार भरा जायेगा जैसे मूल रिक्त स्थान भरा गया था और इस प्रकार नामित किया गया सदस्य तीन वर्ष की अवधि के शेष अंश के लिए पद पर बना रहेगा.

सदस्यता से त्याग पत्र तथा इसके प्रभावी होने की तारीख

10

जब कोई सदस्य संगठन की सदस्यता से त्याग पत्र देने की इच्छा रखता है, तो वह अपना त्याग पत्र महानिदेशक को भेजेगा. त्याग पत्र केवल अध्यक्ष द्वारा उसको स्वीकार किये जाने की तारीख से प्रभावी होगा..

अधिनियमों की वैधता

11

संगठन उसके निकाय में किसी भी रिक्त स्थान के बावजूद कार्य करेगा तथा केवल ऐसे रिक्त स्थान और इसके किसी भी सदस्य की नियुक्ति में किसी भी त्रुटि के कारण संगठन का कोई अधिनियम, अनुदेश अथवा प्रक्रिया अवैध नहीं होगी..

 

 

 

2. संगठन के प्राधिकारी

 

प््राधिकारी

12

(1) संगठन सोसायटी

(2) शासी बोर्ड

(3) अध्यक्ष

(4) महानिदेशक

(5) ऐसे अन्य निकाय/समितियॉं जो संगठन द्वारा गठित अथवा नियुक्त की जा सकती है और इस प्रकार घोषित की जा सकती है.

महानिदेशक  

13

महानिदेशक संगठन का मुख्य कार्यपालक अधिकारी होगा, उसकी नियुक्ति सरकार द्वारा की जायेगी..

संगठन के अधिकारियों तथा स्टाफ के सदस्यों की नियुक्ति

संगठन अथवा इन नियमों और ऐसी नियुक्तियों के लिए इन नियमों के अंतर्गत बनाए गए उपनियमों के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी संगठन के अधिकारियों तथा स्टाफ के सदस्यों की नियुक्ति कर सकते हैं जिनकी जरूरत महानिदेशक तथा/अथवा उसके अधीनस्थ अधिकारियों की सहायता के लिए हो सकती है ताकि संगठन के अंतर्नियमों में निर्धारण उद्देश्यों का पालन किया जा सके..

संगठन की शक्तियॉं

15

संगठन के पास, सरकार द्वारा लगाए जाने वाले प्रतिबंधों तथा इस बारे में समय-समय पर भारत सरकार द्वारा जारी किये जाने वाले दिशानिर्देशों/मार्गनिर्देशों के अधीन, सभी कार्य करने का पूरा अधिकार होना तथा अधिकारियों और इसके अधीनस्थ निकायों को ऐसे निर्देश जारी करने का पूरा अधिकार होगा. जो संगठन के अंतर्नियमों में निरूपित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक, आनुषांगिक अथवा सहायक समझे जा सकते हैं..

संघटक इकाईयों की प्रगति एवं निष्पादन की समीक्षा

16

संगठन अपनी बैठकों में जो वर्ष में कम से कम एक बार होती है, संगठन की प्रगति एवं निष्पादन की समीक्षा करेगा और ऐसा नीति निर्देश देगा जो यह उचित समझेगा..

बैठकों के नोटिस आदि

17

संगठन के सदस्यों को एक नोटिस अथवा कोई अन्य सूचना या तो व्यक्तिगत रूप से अथवा लिफाफे में डाक के जरिए दी जायेगी. लिफाफा सदस्य के उस पते पर भेजा जायेगा जो सदस्यों के रजिस्टर में नोट किया गया होगा.

 

 

 

3   अध्यक्ष

 

शक्तियॉं

18

(क) अध्यक्ष संगठन के कार्य के संचालन के लिए ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगें जो इन नियमों में प्रदान की गई हैं अथवा जो उसको संगठन द्वारा समय-समय पर प्रदत्त की जा सकती हैं.

(ख) उपरोक्त (क) के उपनियम की व्यापकता के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, अध्यक्ष के पास निम्नलिखित शक्तियॉं होंगी :-

(1) संगठन से संबंधित कोई भी सूचना, दस्तावेज अथवा आंकडे मांगना.

(2) संगठन के किसी भी प्राधिकारी को ऐसे निर्देश अथवा अनुदेश जारी करना जिसे वह संगठन के हित में उचित समझता है/समझती है.

(3) संगठन के कार्य तथा प्रगति की समीक्षा करना.

(4) संगठनों के मामलों की जांच करने तथा रिपोर्ट देने के लिए समितियॉं अथवा आयोग नियुक्त करना तथा उन पर ऐसे आदेश पारित करना जो वह उचित समझता है/समझती है.

(5) उचित नोटिस पर किसी भी समय किसी भी प्रयोजन के लिए संगठन की बैठक आयोजित करने के लिए निर्देश देना. शक्तियों का प्रत्यायोजन 19 अध्यक्ष लिखित रूप में उपाध्यक्ष तथा महानिदेशक को अपनी ऐसी शक्तियों को प्रत्यायोजित कर सकता है/सकती है जिन्हें वह आवश्यक समझता/समझती है.

शक्तियों का प्रत्यायोजन

19

अध्यक्ष लिखित रूप में उपाध्यक्ष तथा महानिदेशक को अपनी ऐसी शक्तियों को प्रत्यायोजित कर सकता है/सकती है जिन्हें वह आवश्यक समझता/समझती है

 

 

 

4. महानिदेशक

 

शक्तियॉं एवं कार्य

20

(क) किसी भी आदेश के अधीन जो भारत सरकार तथा संगठन के अन्य प्राधिकारियों द्वारा पारित किया जा सकता है, महानिदेशक, प्रमुख कार्यपालक अधिकारी के रूप में निम्नलिखित के लिए उत्तरदायी होगाः-

(1) संगठन के कार्यों तथा नियम 51 के अधीन संगठन की निधियों का उचित संचालन.

(2) संगठन के सभी कर्मचारियों के कर्त्तव्य को निर्धारित करना.

(3) संगठन के सभी कर्मचारियों के कार्य और आचरण पर निगरानी रखना तथा उस पर अनुशासनिक नियंत्रण रखना.

(4) संगठन की सभी गतिविधियों का समन्वय करना तथा उन पर सामान्य रूप से निगरानी रखना.

(5) संगठन की ओर से सभी संविदाओं, विलेखों तथा अन्य दस्तावेजों का निष्पादन करना, यदि ऐसा शासक मंडल द्वारा प्राधिकृत किया गया है.

(ख) महानिदेशक के लम्बी छुट्टी पर जाने से उसकी अनुपस्थिति में, भारत अथवा विदेश में प्रतिनियुक्ति पर होने अथवा कार्यालय के बंद होने पर उसके कर्त्तव्यों की देखरेख का प्रबंध अध्यक्ष द्वारा सरकार के अनुमोदन से किया जा सकता है.

(ग) महानिदेशक उन सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियों का प्रयोग करेगी जो उसे इन नियमों के अधीन प्रदान की गई तथा ऐसी शक्तियों का भी प्रयोग करेगा जो समय-समय पर उसे प्रत्यायोजित की जा सकती है.

(घ) सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम (1860 का 21) की धारा 6 के प्रयोजन हेतु महानिदेशक को संगठन का प्रमुख कार्यपालक अधिकारी माना जायेगा तथा वह संगठन के महानिदेशक के नाम पर मुकदमा चला सकता है अथवा उस पर महानिदेशक के नाम से मुकदमा चलाया जा सकता है. महानिदेशक, संगठन के किसी अन्य अधिकारी को अपने स्थान पर हस्ताक्षर करने और याचिका के सत्यापन के लिए लिखित रूप में प्राधिकृत कर सकता है.

(ड) महानिदेशक, अध्यक्ष के लिखित अनुमोदन से अपनी शक्तियों को संगठन में अपने से निचले स्तर के अधिकारियों को इस प्रकार प्रत्यायोजित करेगा जैसा उसे आवश्यक प्रतीत हो.

(च) महानिदेशक संगठन तथा अध्यक्ष के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत कार्य करेंगे.

(छ) महानिदेशक संगठन सोसायटी की बैठकों की सूचनाएं जारी करने के लिए जिम्मेदार होगा और इसका शासी बोर्ड, संगठन सोसायटी तथा शासी बोर्ड की कार्यवाहियों के कार्यवृत्त रखेगा अथवा रखने के निमित्त होगा.

 

 

 

5. संगठन सोसायटी

 

सदस्य

21

संगठन की एक संगठन सोसायटी होगी और इसमें संगठन के सभी सदस्य सम्मिलित होंगे.

 

 

 

6. संगठन सोसायटी की बैठकें

 

वार्षिक आम बैठक

22

अध्यक्ष द्वारा निश्चित ऐसी तारीख, समय और स्थान पर संगठन की वार्षिक संगठन समिति की बैठक आयोजित की जायेगी जिसमें निम्निलिखित कार्यों को सम्पादित किया जा सके :-

 

(1) संगठन की वार्षिक रिपोर्ट पर विचार ;

(2) संगठन के वार्षिक लेखों सहित उसकी लेखा परीक्षित रिपोर्ट पर विचार ;

(3) कार्य सूची में दिये गये अन्य कार्य.

विशेष आम बैठक

23

(क) अध्यक्ष, जब भी उपयुक्त समझे, संगठन सोसायटी की एक विशेष बैठक का आयोजन कर सकता है/सकती है.

(ख) सभी विशेष बैठकों में, नोटिस या मांग पत्र जैसी भी स्थिति हो, में दर्शाए गये विषयों के अलावा अन्य विषयों पर तब तक चर्चा नहीं की जायेगी जब तक अध्यक्ष द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत न किया जाये.

(ग) इस प्रकार संगठन सोसायटी के सदस्यों द्वारा की गई कोई भी मांग, बुलाई जाने वाली प्रस्तावित बैठक के उद्देश्य को प्रकट करेगी तथा महानिदेशक के कार्यालय की इच्छा पर छोड दी जायेगी.

(घ) अध्यक्ष, संगठन के कम से कम 3 सदस्यों की लिखित मांग पर संगठन सोसायटी की विशेष बैठक आयोजित करेगा.

बैठकें बुलाना

24

संगठन सोसायटी की सभी बैठकें महानिदेशक द्वारा लिखित सूचना पर और उनके हस्ताक्षर से बुलाई जायेगी.

बैठक के लिए सूचना

25

संगठन सोसायटी की बैठक बुलाने वाली प्रत्येक सूचना में बैठक की तारीख, समय और स्थान दर्शाया जाना चाहिए और यह सूचना संगठन के प्रत्येक सदस्य को बैठक के आयोजन के दिन से कम से कम 10 दिन पूर्व दे दी जानी चाहिए. सूचना के विलम्ब से मिलने अथवा न मिलने पर बैठक की वैधता.

सूचना के विलम्ब से मिलने अथवा न मिलने पर बैठक की वैधता

26

किसी सदस्य को सूचना देने में कोई भी असावधानी, चूक अथवा सूचना न मिलने या सूचना विलम्ब से मिलने पर बैठक की कार्यवाहियॉं अवैध नहीं होंगी.

बैठकों का अध्यक्ष और उनका निर्वाचन

27

27 संगठन सोसायटी की सभी बैठकों की अध्यक्षता अध्यक्ष करेगा. उसकी अनुपस्थिति में, संगठन की बैठकों की अध्यक्षता उपाध्यक्ष करेगा. अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष दोनों की अनुपस्थिति में उपस्थित सदस्य अपने में से एक सदस्य को उस बैठक के अध्यक्ष के रूप में चुनेंगे.

गणपूर्ति (कोरम)

28

संगठन की किसी भी बैठक में, संगठन सोसायटी के चार सदस्यों की उपस्थिति से कोरम पूरा हो जायेगा.

निशेषाधिकार द्वारा विवादस्पद प्रश्नों का निर्धारण

29

(क) संगठन की किसी भी बैठक में, सभी विवादस्पद प्रश्नों का निर्धारण सदस्यों के निशेषाधिकार द्वारा किया जायेगा. इसमें उपस्थित तथा मतदान करने वाले सहयोजित व्यक्ति अथवा विशेष रूप से आमंत्रितों की शामिल नहीं किया जायेगा.

(ख) संगठन के प्रत्येक सदस्य का एक वोट होगा.

(ग) समान संख्या में वोट होने की स्थिति में, अध्यक्ष का वोट निर्णायक होगा. टप्प् शासी बोर्ड

 

 

 

 

शासी बोर्ड में निम्नलिखित व्यक्ति शामिल होंगे :-

 

सदस्य

30

नेहरू युवा केन्द्र संगठन के नाम से पंजीकृत सोसायटी के निम्नलिखित सदस्य होगेंः-

 

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1.            युवा कार्यक्रम एवं खेल के प्रभारी मंत्री - अध्यक्ष (पदेन)

2.            युवा कार्यक्रम एवं खेल के प्रभारी राज्य मंत्री - वरिष्ठ उपाध्यक्ष (पदेन)

3.            सचिव, युवा मामले - वरिष्ठ उपाध्यक्ष (पदेन) (उस स्थिति में जब दोनों माननीय मंत्रियों के पद रिक्त हों जैसे युवा कार्यक्रम एवं खेल या राज्य मंत्री)

4 एवं 5 सरकार द्वारा नामित दो सांसद (लोक सभा) -सदस्य

            

6.            सरकार द्वारा नामित एक सांसद (राज्य सभा) - सदस्य

 

7.      सचिव, खेल सदस्य (पदेन)

8.    निदेशक, एनसीसी सदस्य (पदेन)

9.    निदेशक, एलबीएस एनएनए सदस्य (पदेन)

10.    संयुक्त सचिव युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय - सदस्य (पदेन)

11. अतिरिक्त सचिव/संयुक्त सचिव एवं वित्त सलाहकार युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय - सदस्य (पदेन)

12. कार्यक्रम सलाहकार, एनएसएस - सदस्य (पदेन)

13 निदेशक, आरजीएनवाईडी - सदस्य (पदेन)

14 से 18. संस्कृति, समाज कार्य, स्वैच्छिक संस्थाओं, अकादमियों, प्रशिक्षण संस्थानों, सूचना, साहसिक खेलों, कला तथा अन्य संबद्ध क्षत्रों से प्रतिष्ठित व्यक्ति - सदस्य

19. एक अन्य व्यक्ति जिसे अध्यक्ष द्वारा नामित किया जायेगा-सदस्य

20. संगठन का महानिदेशक - सदस्य सचिव (पदेन)

विशेष रूप से आमंत्रित

31

शासी बोर्ड का अध्यक्ष समय-समय पर शासी बोर्ड की बैठकों में भाग लेने के लिए विशेष आमंत्रितों के रूप में अधिसूचना 3 सदस्यों को, जैसा उसे आवश्यक लगे, अतिरिक्त व्यक्तियों के रूप में आमंत्रित कर सकता है. ऐसे आमंत्रित व्यक्ति बैठक में वोट देने के पात्र नहीं होंगे.

कार्य

32

शासी बोर्ड संघ के ज्ञापन में प्रदर्शित संगठन के उद्देश्यों पर सामान्यतः विचार करेगा और उसको कार्य रूप देगा और ऐसा करते समय, सरकार अथवा संगठन सोसायटी द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों/मार्गनिर्देशों का पालन तथा क्रियान्वयन करेगा.

शक्तियॉं

33

(क) सरकार द्वारा समय-समय पर लागू व्यय संबंधी ऐसी सीमाओं के बावजूद शासी बोर्ड किसी भी सांविधानिक विषय के द्वारा अथवा इसके अंतर्गत संगठन की सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों को, जिनमें इसे निहित अथवा प्रदत्त की जाने वाली सभी शक्तियॉं शामिल हैं, प्रयोग करेगा.

(ख) विशेषकर और पूर्ववर्ती प्रावधानों की व्यापकता के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, शासी बोर्ड के पास, इसके अंतर्गत बनाए गए इन नियमों और उपनियमों के प्रावधानों के अधीन निम्नलिखित शक्तियॉ होगी.

(1) वार्षिक तथा पूरक बजट अनुमानों को ऐसे संशोधनों के साथ अंतिम रूप देना जो आवश्यक समझे जाएं.

(2) संगठन की वार्षिक आम बैठक में प्रस्तुत करने के लिए संगठन की वार्षिक रिपोर्ट तथा लेखे सहित उनकी लेखा परीक्षित रिपोर्ट तैयार करना.

(3) केन्द्रों, संस्थानों, इकाईयों, सेंटरों, शाखाओं, क्षेत्रीय कार्यालयों, रिहायशी क्षेत्रों, इमारतों आदि की स्थापना, रख-रखाव, समामेलित करना और/अथवा बंद करना.

(4) संगठन के उद्देश्यों में आगे और वृद्धि करने के लिए सरकार के साथ समझौते करना और सरकार के माध्यम से विदेशी तथा अंतर्राष्ट्रीय एजेन्सियों और संगठनों, राज्य सरकारों तथा अन्य निकायों अथवा संगठनों के साथ समझौता करना.

(5) संगठन के प्रयोजनार्थ, उन समितियों और उपसमितियों को नियुक्त और भंग करना जिनमें ऐसे व्यक्ति शामिल हों जो संगठन के सदस्य अथवा संगठन के कर्मचारी न हों.

(6) दान, अनुदान, उपहार, स्वीकार और एकत्र करना तथा किसी धर्मार्थ अथवा न्यास के कोष के प्रबंधन को शुरू करना तथा संगठन के प्रयोजनार्थ दान, अनुदान और उपहार देना.

(7) पदों की संख्या, क्रम तथा पदो ंके वेतन संबंधी ग्रेड निश्चित करना. पदों का सृजन, निलंबन अथवा समाप्ति और परिस्थितियों तथा संगठन के कर्मचारियों की सेवा शर्तां को ऐसी शर्तों के अधीन निश्चित करना जैसा सरकार, यदि वह चाहे तो, समय-समय पर निर्धारित कर सकती है.

(8) संगठन के लिए आवश्यक पूरे स्टाफ को ऐसी शर्तां पर नियुक्त करना ; जो ऐसी अन्य शर्तों के अधीन उचित और उपयुक्त प्रतीत हो, जो सरकार, यदि वह चाहे तो, समय-समय पर निर्धारित कर सकती है.

(9) सरकार की पूर्व अनुमति से उपहार, खरीद, आदान-प्रदान, किराया आधार पर पट्टे या किसी अन्य प्रकार से, चाहे जो भी हो, कोई भूमि, भवन, सुविधा या कोई अचल सम्पत्ति अथवा एस्टेट अथवा सभी के हित के लिए प्रोत्साहन या संगठन के किसी उद्देश्य के लिए हो.

(10) सरकार की पूर्व अनुमति से घरों अथवा अन्य इमारतों को बनाना, निर्माण तथा रख-रखाव और परिवर्तन, विस्तार, सुधार, मरम्मत, बढाना अथवा उसमें सुधार करना जिसमें कोई भी वर्तमान इमारतें शामिल हैं तथा उन्हें बिजली, जल, निकास, फर्नीचर लगाना, उपस्करों, संयंत्रों और उपकरणों तथा प्रत्येक इमारत में इस्तेमाल की सभी अन्य आवश्यकताएं लगाना.

(11) सरकार के पूर्व अनुमोदन से, संगठन से संबंधित अथवा संगठन के नियंत्रणाधीन किसी भूमि और/अथवा किसी अन्य अचल सम्पत्ति का निर्माण अथवा अन्यथा अधिग्रहण, विस्तार, परिवर्तन, बढाना, सुधार और इस्तेमाल करना.

(12) संगठन के किसी एक अथवा अधिक उद्देश्यों को प्रोत्साहन देने के लिए किसी विशिष्ट दानदाता द्वारा निर्मित या कि विशेष न्यासों के अधीन अथवा बिना शर्त का कोई नकद अथवा अचल अथवा चल सम्पत्ति, किसी भी रूप में, स्वीकार और प्राप्त करना.

(13) संगठन की कोई भी सम्पत्ति बेचना, संचालन करना, हस्तातंरण, आदान प्रदान करना, गिरवी, पट्टे पर देना, निपटान करना बशर्तें की अचल सम्पत्तियों के संबंध में ऐसी शतो्रं पर सरकार का पूर्व अनुमोदन प्राप्त कर लिया जाय, जो सरकार द्वारा अनुमोदित कर दी गई हो.

(14) बोनस, बंधक, वचन पत्रों अथवा अन्य दायित्वों या ऐसी तर्कसंगत प्रतिभूतियों जो संगठन की सभी सम्पत्ति और परिसम्पत्ति पर आधारित हो अथवा किसी भी प्रतिभूति के बिना धन राशि उन शर्तों पर एकत्र करता तथा उधार लेना जो सरकार द्वारा अनुमोदित की जा सकती है.

(15) किसी निवेश के पक्षान्तरण हेतु ऐसी प्रतिभूतियों में संगठन की निधियों का निवेश अथवा लेन देन करना जो समय-समय पर संगठन द्वारा उपयुक्त समझी जाय.

(16) संगठन के किसी भी कर्मचारी के लाभार्थ ऐसे अनुदान जो संगठन के विचार से उपयुक्त हो.

(17) क्रमशः वचन पत्रों, हुडिंयों, धनादेशों अथवा अन्य पर क्राम्य लिखतों को प्राप्त करना, स्वीकार, पृष्ठांकन और बातचीत करना.

(18) संगठन के कार्यों को चलाने तथा इन पर नियंत्रण रखने के लिए संगठन के अनुमोदन के अधीन और सरकार के पूर्व अनुमोदन से जैसा भी आवश्यक हो, ऐसे नियम और उपनियम बनाना और समय-समय पर उन्हें संशोधित और निरस्त करना.

(19) संगठन के महानिदेशक और संगठन के किसी अन्य अधिकारी को ऐसी प्रशासनिक, वित्तीय और अन्य शक्तियों प्रत्यायोजित करना, जो आवश्यक एवं उपयुक्त हो.

बैठकों की आवृति

34

शासी बोर्ड जब भी आवश्यक होगा तब साधारणतः वर्ष की प्रत्येक तिमाही में कम से कम एक बार बैठक बुलाएगा.

बैठकों की तारीख, समय और स्थान

35

शासी बोर्ड की बैठकें अध्यक्ष द्वारा निर्धारित तारीख, समय और स्थान पर आयोजित की जाएंगी.

बैठकों और इसकी सेवा के लिए सूचना

36

(क) शासी बोर्ड की सभी बैठकें सदस्य सचिव के द्वारा लिखित रूप में उनके हस्ताक्षरयुक्त नोटिस के आधार पर बुलाई जाएंगी.

(ख) शासी बोर्ड द्वारा बुलाई गयी प्रत्येक बैठक की सूचना में बैठक की तारीख, समय और स्थान दर्शाया जाएगा और ऐसी सूचना बैठक की निर्धारित तारीख से सामान्यतः कम से कम 10 दिन पूर्व पहुॅंच जाना चाहिए.

बैठकों की कार्यवाहियों की वैधता

37

सूचना देने में असावधानीवश कोई चूक होने अथवा किसी सदस्य को सूचना न मिलने अथवा विलम्ब से मिलने से बैठक की कार्यवाही अवैध नहीं होगी.

बैठकों का अध्यक्ष

38

शासी बोर्ड की बैठकों की अध्यक्षता इसके अध्यक्ष द्वारा की जाएगी उनकी अनुपस्थिति में, उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगा/करेगी ; दोनों की अनुपस्थिति में, बैठक में शासी बोर्ड के उपस्थित सदस्य उस बैठक के लिए अपने में से एक सदस्य का अध्यक्ष के रूप में चुनाव करेंगे.

गणपूर्ति (कोरम)

39

शासी बोर्ड की बैठक के लिए, शासी बोर्ड के चार सदस्यों की उपस्थिति से कोरम पूरा हो जायेगा.

बहुमत के द्वारा मामलों का निर्धारण

40

शासी बोर्ड के प्रत्येक सदस्य के पास एक वोट होगा मंडल द्वारा निर्धारित किए जाने वाले मामले का निर्धारण बहुमत के द्वारा होगा. यदि किसी मामले में मतों की संख्या बराबर हो या कोई और प्रश्न उठ खडा हो, तो उस सूरत में, अध्यक्ष निर्णायक मत दे सकता है.

संकल्प के परिचालन के द्वारा कार्यों का संचालन

41

उपरोक्त नियम 40 के परन्तुक के अधीन, कोई भी कार्य, जो कि शासी बोर्ड के सदस्यों के लिए करना जरूरी हो सकता है, लिखित रूप में संकल्प पारित करके, इसके सभी सदस्यों के बीच परिचालित करके किया जा सकता है, और इस प्रकार कोई भी संकल्प जो कि परिचालित किया जा चुका हो और अधिकांश सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जा चुका हो, उतना ही प्रभावी और अनिवार्य होगा जैसा कि मंडल की बैठक में पारित किए गए ऐसे संकल्प.

कार्य विवरणों का अनुमोदन

42

शासी बोर्ड की सभी बैठकों के कार्य विवरण और पारित किया गया संकल्प, सदस्य सचिव द्वारा मंडल के अध्यक्ष महोदय को अनुमोदनार्थ भेजे जायेंगे.

कार्य विवरण पर कार्रवाई

43

शासी बोर्ड की बैठकों के कार्य विवरण पर कार्रवाई अविलंब की जाएगी. कार्य विवरण की एक प्रति अध्यक्ष महोदय को सूचना या निर्देश, यदि कोई हो, के लिए भिजवाई जाएगी. 

संगठन की निधि

44

संगठन की निधियों में निम्नलिखित शामिल होंगे.

(1) संगठन द्वारा सरकार, राज्य सरकारों, संघ शासित क्षेत्र प्रशासनों आदि से प्राप्त अनुदान.

(2) संगठन को प्राप्त दान, उपहार और अन्य धनराशि.

(3) आय और अन्य साधनों से प्राप्तियां.

(4) निवेशों से आय.

(5) अन्य किसी स्त्रोत से आय

संगठन की सम्पत्ति और आय

45

संगठन की सारी सम्पत्तियां चल या अचल, संगठन में निहित होगी, और शासी बोर्ड संगठन की आम बैठक में उनके द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुसार या समय-समय पर सरकार के निर्देशानुसार इसका संचालन करेगा.

 

46

Tसंगठन चल या अचल, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष (जिसमें कापीराइट पेटेंट और बौद्धिक सम्पत्ति भी शामिल है) सम्पत्ति की खरीद, किराया, पट्टा, आदान-प्रदान कर सकता है या अन्यथा सम्पत्ति अर्जित कर सकता है, जोकि संगठन के लिए आवश्यक अथवा सुविधाजनक हो और इन इमारतों का निर्माण इनमें परिवर्तन और/या रख-रखाव कर सकते हो जो संगठन के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक हो.

 

47

संगठन, संगठन की सारी या/किसी सम्पत्ति, चल या अचल सम्पत्ति को बेच किराये, पट्टे पर, आदान-प्रदान या स्थानान्तरित कर या उसका निपटान कर सकता है बशर्तें कि अचल सम्पत्ति के स्थानान्तरण के लिए भारत सरकार का अग्रिम अनुदान प्राप्त करना होगा.

 

48

तथापि, संगठन की आय और सम्पत्ति से प्राप्तियों को एसोसिएशन के ज्ञापन में सामने रखे गये उद्देश्यों के संवर्धन के लिए लगाया जाएगा फिर भी सरकार द्वारा दी गई अनुदान राशि के व्यय के संबंध में सरकार समय-समय पर शर्त और प्रतिबंध लगा सकती है. संगठन की आय अधिलाभ या अन्य किसी भी रूप में, मुनाफे के रूप में, किसी ऐसे व्यक्ति को अदा या हस्तांरित नहीं किया जायेगा जो किसी समय संगठन का सदस्य था या है या उनमें से कोई एक या कोई व्यक्ति जो उनके माध्यम से दावा कर रहा है या इनमें से कोई एक है परंतु किसी सदस्य को नेकनीयती के बतौर मानदेय देने से या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संगठन को प्रदान की गई किसी सेवा के बदले में भुगतान करने पर कोई रोक नहीं लगा सकेगा.

संगठन के बैंकर

49

(1) संगठन के बैंकर भारतीय स्टेट बैंक और इसके सहायक और/या राष्ट्रीयकृत बैंक होगें.

(2) जब तक कि शासी बोर्ड अधिकृत नहीं करता कोई भी नया खाता नहीं खोला जाएगा.

(3) बैंक में संगठन के खाते में से कोई भी राशि नहीं निकाली जाएगी जब तक कि चैक शासी बोर्ड की ओर से विधिवत रूप से किसी शक्ति प्रदत्त अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित और प्रतिहस्ताक्षरित न हो.

लेखा परीक्षक

50

संगठन के लेखों की लेखा परीक्षा ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा की जाएगी जिसका नामांकन भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के परामर्श से सरकार द्वारा समय-समय पर इस प्रयोजनार्थ किया गया हो.

वित्तीय मामलों में सलाह

51

संगठन के मुख्यालय में एक पूर्णकालिक वित्तीय सलाहकार होगा जोकि बजट अनुमान तैयार करने, लेखों के रख-रखाव, आतंरिक लेखा परीक्षा, कोष और शासी बोर्ड द्वारा उनको सौंपे गये अन्य कार्यों के संचालन के लिए जिम्मेवार होगा. वित्तीय सलाहकार उपरोक्त कार्यों के लिए शासी बोर्ड के प्रति उत्तरदायी होगा ऐसे सभी मामले जिनमें वित्तीय विवक्षा हो. उन पर वित्तीय सलाहकार से परामर्श लिया जायेगा और असहमति के मामले में उसके विचार अध्यक्ष या शासी बोर्ड के सामने रखे जायेंगे. यदि अंतिम आदेशों के लिए अध्यक्ष द्वारा ऐसा निदेश दिया गया हो.

वार्षिक रिपोर्ट

52

संगठन के कार्य विवरणों और वर्ष के दौरान किए गए सारे कार्यों के लिए वार्षिक रिपोर्ट शासी बोर्ड द्वारा तैयार की जाएगी. यह रिपोर्ट संगठन सोसायटी के सदस्यों को सूचना देने और संगठन के वार्षिक लेखे इस पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट के साथ संगठन सोसायटी के सम्मुख इसकी वार्षिक सामान्य बैठक में अनुमोदनार्थ रखी जाएगी. अनुमोदित रिपोर्ट सरकार को भेज दी जाएगी और संसद के सदनों के सभी पटल पर रख दी जाएगी.

संगठन की मोहर

53

संगठन के शासी बोर्ड के पास एक मोहर होगी जिसका इस्तेमाल पूर्व अनुमोदन के साथ केवल ऐसे मामलों में किया जाएगा जहां संगठन के लिए कानून के तहत किसी कागजात या लिखत पर मोहर लगाना आवश्यक हो या जब तक शासी बोर्ड अन्यथा निर्णय नहीं लेता ऐसे कागजात/लिखित पर शासी बोर्ड के सदस्य और सदस्य सचिव या/ऐसे अन्य अधिकारी या व्यक्ति जिनहें मंडल ने प्राधिकृत किया हो, हस्ताक्षर कर सकेंगे.

 

 

 

8     संशोधन

 

संगठन के प्रयोजन में परिवर्तन या विस्तार

54

सरकार द्वारा पूर्व में लिए गए अनुमोदन के अधीन, संगठन निम्नलिखित कार्यपद्धति को अपनाकर, इसके उन प्रयोजनों में परिवर्तन या विस्तार कर सकता है जिसके लिए इसकी स्थापना हुई थी या पूर्णतः या अंशतः किसी अन्य संगठन के साथ समामेलन हुआ था :-

(3)(क) कथित प्रस्ताव पर विचार करने के लिए इन नियमों के अनुसार, शासी बोर्ड, संगठन के सदस्यों की विशिष्ट सामान्य बैठक आयोजित करेगा.

(ख) जैसा कि ऊपर कहा गया है कि शासी बोर्ड ऐसे परिवर्तन, विस्तार या समामेलन के लिए संगठन के सदस्यों को लिखित या मुद्रित रिपोर्ट के रूप में प्रस्ताव भेजेगा.

(ग) उपरोक्त विशिष्ट सामान्य बैठक के स्पष्ट रूप में 15 दिन पहले संगठन के प्रत्येक सदस्य को ऐसी रिपोर्ट पहुॅचाई जाएगी या डाक से भिजवाई जाएगी.

(घ) ऐसा प्रस्ताव सम्मत मान लिया जायेगा यदि उपयुर्क्त विशिष्ट सामान्य बैठक में संगठन के 3/5 सदस्यों तक ने इसके पक्ष में मतदान किया हो.

(ड) ऐसे प्रस्ताव पिछली बैठक के एक महीने के अंतराल के पश्चात शासी बोर्ड द्वारा आयोजित की गई अनुवर्ती विशिष्ट सामान्य समिति की बैठक में उपस्थित संगठन के सदस्यों के 3/5 मतों के द्वारा अनुमोदित माने जायेगें.

नियमों में परिवर्तन/संशोधन  

55

सरकार की स्वीकृति के साथ, संगठन के नियमों में किसी भी समय इस प्रयोजनार्थ आयोजित संगठन के सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित संकल्प में परिवर्तन किया जा सकता है.

संगठन के नाम में परिवर्तन

56

संगठन, सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 की धारा 12 और 12-ए के अनुसार अपना नाम बदल सकता है.

शासी बोर्ड की वार्षिक सूची

57

संघ शासित क्षेत्र दिल्ली पर लागू सोसायटी रजिस्ट्रीकरण, 1860 की धारा 4 के अंतर्गत ऐसी अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक वर्ष में एक बार पदधारियों और शासी बोर्ड के सदस्यों की सूची सोसायटी के रजिस्ट्रार के पास दाखिल की जाएगी.

कार्यों के समायोजन में विघटन

58

यदि संगठन को समाप्त करने की आवश्यकता पडे तो इसे संघ शासित क्षेत्र दिल्ली पर लागू सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1860 की धारा 13 और 14 के अंतर्गत रखे गए प्रावधानों के अनुसार समाप्त किया जा सकता है.

 

59

संगठन की समाप्ति या विघटन होने पर इसके ऋणों और देयताओं को संतुष्ट करने के पश्चात जो कोई भी सम्पत्ति शेष रह जाती है तो उसे संगठन के सदस्यों या उनमें से किसी एक के बीच अदा नहीं किया जाएगा अथवा बांटा नहीं जाएगा परंतु उसे ऐसे तरीके से निपटाया जाएगा जैसा कि सरकार निर्धारित करेगी.

सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम को लागू करना

60

स्ांघ शासित क्षेत्र दिल्ली पर लागू होने वाले सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1860 की सभी धाराओं के अंतर्गत आने वाले सभी प्रावधान इस संगठन पर भी लागू होंगे.

अनिवार्यता प्रमाण पत्र

61

यह प्रमाणित किया जाता है कि यह संगठन के नियमों की प्रमाणित प्रति है.